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क्या आप को मालूम है?

> सऊदी अरब के एक बैंक में ख़लीफ़ा-ए-सोम हज़रत उस्मान बिन अफ्फ़ान (रज़ी अल्लाहू तआला अन्ह) का आज भी 'करंट

एलएलबी में गोल्ड मेडल लेने वाली बेटी अब बन गई जज

मेरी सफलता समाज के उस तबके के लिए बड़ी नसीहत है। जो बेटियों को कमजोर मानते हैं। आज जमाना बेटियों के साथ कदम बढ़ा

ऐसे ऑपरेशन की फिल्में ही बनाते रहेंगे या हकीकत में भी ऐसा कर सख्त पैगाम दे सकते हैं?

हजार जख्म से मौत देने की पाकिस्तान की रणनीति, जनरल जिया उल हक ने अपने कार्यकाल में शुरू की थी। पाकिस्तान ने आतंक

भारतीय समाज एवं धर्म-दर्शन में नारी की स्थिति-जो नीचों से नीच है स्त्रियाँ उनसे भी नीच हैं (आरण्य क

भारतीय समाज में नारी की स्थिति अत्यन्त दयनीय है, जहाँ उन्हें तरह-तरह के अंधविश्वास में जकड़ दिया गया है कि वह अप

पवित्र क़ुरआन में कहा गया हैं- ‘‘ धर्म में कोर्इ जोर-जबरदस्ती न करो, सत्य, असत्य से साफ़ भिन्न दिखार

मुसलमानों ने स्पेन पर लगभग 800 वर्ष शासन किया और वहॉ उन्होने कभी किसी को इस्लाम स्वीकार करने के लिए मज़बूर नही किया

मुल्क क्या बंटा, उर्दू मुसलमान हो गई ???

घर क्या बंटा, बेटी अनजान बन गई।मुल्क क्या बंटा, उर्दू मुसलमान हो गई।Rajeev Sharma Kolsiya बचपन से ह

ईरान और सऊदी अरब “शिया-सुन्नी” के नाम पर मुसलमान को गुमराह कर रहे हैं

सबसे ज्यादा बेवकूफ़ वो लोग होते हैं जिनकी तबाही के लिए दुनिया घात लगाए बैठी हो, और वो लोग हों कि आपस मे अपनों ही की

बस दुश्मनी है, जो निभानी है क़ब्र तक, डंडा है जो बजवाना है अपनी पीठ पर क़ब्र में हश्र तक ।

देवबन्दी बरेलवी और अहले हदीस, आम तौर से हिन्दुस्तानी सुन्नी मुसलमान इन तीन फ़िरक़ों में बंटे हुए हैं, और इनके आपस

मदरसे, मुसलमानों के पैसे से चलते थे, चलते हैं और चलते रहेंगे।

जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने मुसलमानों को आरक्षण देने की वकालत करती हुई ऐसी रिपोर्ट पेश की जिसे पढ़ कर कोई भी ईमानदार

तो ‘जय हिंद’ का नारा एक मुस्लमान ने दिया था !!

हम अब तक यही मानते आए हैं कि सुभाष चंद्र बोस ने सबसे पहले ‘जय हिंद’ का नारा दिया था, लेकिन हैदराबाद की महान शख्सि

“अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो” लिखने वाला शायर ‘कैफ़ी आज़मी’

कैफ़ी आज़मी (असली नाम : अख्तर हुसैन रिजवी) उर्दू के एक अज़ीम शायर थे। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिए भी क

सेनापति हकीम खां सूर की मजार पर असामाजिक तत्वों ने की तोड़फोड़

मेवाड़की आन-बान शान के लिए हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर के खिलाफ तलवार खिंचने वाले प्रमुख अफगानी योद्धा हकीम खा

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