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जब मुसलमानों को डरना सिखाया ही नहीं गया, तो तुम उन्हें डराओगे कैसे?- अंजली शर्मा

आज हर तरफ से इस्लाम पर और मुसलमानों पर हमले हो रहें हैं जिधर देखो और जब देखो हर तरफ हर वक्त दुश्मनों की यलगार है। कभी मुसलमानों को तौहीद से दूर करने लिए ‘सूर्य नमस्कार’ कराने की बात की जाती है, तो कभी मुसलमानों को कुरआन-ओ-सुन्नत से दूर करने के लिए मदारिसों पर हमले किए जाते हैं, कभी मुसलमानों को सुन्नत ए नबवी से दूर करने के लिए खूनी भेड़िये ‘मारो टोपी वालो को’ कहकर हमला करते हैं और दाढी वालों को तो ये देश के गद्दार और इंसानियत के दुश्मन आतंकवादी और दहशतगर्द कहकर पुकारते हैं। इस्लाम को मिटाने की नाकाम कोशिशे हो रही हैं और मुसलमानों को हर लम्हा सताया जा रहा है। 

  

इस्लाम के दुश्मन और वतन के गद्दार चाहते हैं कि मुसलमानों के दिलों के अंदर खौफ पैदा किया जाए, मुसलमानों को डराया जाए और उनको मारा जाए, उनकी अस्मतें लूटी जाए, उनकी बस्तियों के अंदर आग लगाई जाए, मुसलमानों को बेरोजगार किया जाए, मुसलमानों को इल्म से और हर चीज से महरूम किया जाए, जिससे खौफ खाकर और परेशान होकर मुसलमान कुरआन से दूर हो जाएं और अपने नबी की सुन्नत से दूर हो जाएं और फिर जब मुसलमान कुरआन-ओ-सुन्नत से दूर हो जाएगा तो खुद ही हलाक और बरबाद हो जाएगा।

मैं उन इस्लाम के दुश्मनों से कहना चाहती हूँ – ऐ इंसानियत के दुश्मनों! ऐ वतन के गद्दारों! जरा मुसलमान डराने और मुस्लमान को मिटाने से पहले इनकी तारीख और इनका इतिहास देखिए कि तुमसे पहले कितनी कौम आई और चली गई, तुमसे पहले कितने लोग आए और चले गए जो चाहते थे मुसलमानो को और इस्लाम को मिटाना, जो चाहते थे मुसलमानो को डराना और उनको इस्लाम से दूर करना लेकिन वे कभी अपने नापाक मंसूबों मे कभी कामयाब नही हो सके।

आओ हम तुम्हें बताएं! जब मुसलमान की तादाद 313 से भी कम थी जब बिलाल को आग पर लिटाया जाता और सीने पर एक जोरदार चट्टान रखकर कहा जाता था कि इस्लाम से फिर जा लेकिन बिलाल की जुबान ‘अहद अहद’ पुकारती थी यानी अल्लाह एक है अल्लाह एक हैं, बिलाल तुम्हारे जुल्म से नही डरे थे, तुमसे बिलाल ने खौफ नही खाया और इस्लाम का दामन नही छोड़ा।

 

तुम सुमैया को देखो! जो बूढी हैं जिनको मलऊन अबूजहल कहता है कि इस्लाम से फिर जा वरना जान ले लेंगे लेकिन सुमैया कहती है कि “इस्लाम के लिए जान देना मै फख्र की बात समझती हूं, मेरी जान निकल सकती है लेकिन मै इस्लाम को नही छोडूंगी”, सुमैया को कत्ल किया गया लेकिन सुमैया ने इस्लाम को नही छोडा। अगर जुल्म ज्यादती से मुसलमान डरते तो सुमैया डर चुकी होती लेकिन मुसलमान जुल्म से डरकर इस्लाम नही छोड़ते।

आओ देखो उस सहाबी को जिसको कत्ल के वक्त कहा जाता है कि आपको छोड़ दिया जाएगा अगर आपके बदले मे मुहम्मद को कत्ल कर दिया जाए, जालिमों उस सहाबी का जवाब सुनो, वो नबी का आशिक कहता है कि मुझे यह भी गवारा नही कि नबी जहाँ पर मौजूद हों वहां उनको एक काँटा भी चुभे*। फिर तुम मुसलमानो के दिलों से कैसे नबी की मुहब्बत निकालोगे?

तुम मुसलमानो को कैसे नबी के दीन से दूर करोगे?

 

अल्लाह ने कभी जुल्म से डरने को नही कहा,कुरआन कभी नही कहता कि जालिम के आगे झुक जाओ, नबी ने कभी जालिमों से डरना नही सिखाया।

अगर मुसलमान को सिखाया जाता कि जालिमों के आगे सर झुका दो तो बिलाल झुक चुके होते, हमजा के टुकड़े न होते, सुमैया को शहादत न मिलती लेकिन मुसलमान से कहा गया कि सर अगर झुकेगा तो सिर्फ रब के सामने झुकेगा वरना कट जाएगा लेकिन जालिम के आगे नही झुकेगा।

 

तुम मुसलमान को कहते हो कि हम तुम्हारा रोजगार छीन लेंगे और हमको फक्र(भूख) से डराते हो तो सुनो – मुसलमानो के नबी ने भूख की हालत मे भी वक्त गुजारकर, पेट से पत्थर बांधकर अपने इन गुलामों को, अपने इन आशिकों को सिखा दिया है कि जालिमों के आगे झुकना नही है चाहे पेट से पत्थर ही क्यों न बांधना पड़े।

  ऐ इस्लाम के दुश्मनों! अब बताओ तुम मुसलमान को किस चीज से डराओगे?

 मौत से डराओगे?

मुसलमान मौत से भी नही डरते, हाँ-हाँ मुसलमान को शहादत के फजाईल याद हैं, मुसलमान बताया गया है कि शहीद को मौत के वक्त सिर्फ इतनी तकलीफ़ होती है जितनी चींटी के काटने से होती है, मुसलमान को बताया गया है कि शहीद से कब्र के सवाल भी नही होते, मुसलमान को बताया गया है कि जो मजा शहादत मे है वह तो जन्नत मे भी नही है।* फिर कौन बेगैरत मुसलमान है जो शहादत की तमन्ना नही करेगा?
जालिमों अब तुम ही बताओ! मुसलमान को किस चीज से डराओगे?




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