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हैकैथौन की मांग से डरा चुनाव आयोग,मारा U-Turn, Hackthon कराने से किया मना

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दिल्ली विधानसभा में आप नेता सौरभ भरद्वाज द्वारा की गयी लाइव EVM हैकिंग के बाद चुनाव आयोग बैक फुट पे नज़र आ रहा है। आज हुई सर्वदलीय बैठक में किस तरह से चुनाव आयोग ने हैकेथोन से अपना पीछा छुड़ाया।

जानिये क्या कहा चुनाव आयोग ने आज सर्वदलीय मीटिंग में

एक मंजे हुए राजनीतिक दल की तरह आज चुनाव आयोग ने सर्वदलीय दलों की बैठक में EVM हैकिंग के मुद्दे पर U-Turn मार लिया हैं। आज चुनाव आयोग ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि वह अगले रविवार और सोमवार को सभी राजकीय दलों को आमंत्रित करके साबित करने का चैलेंज देंगे कि पिछले चुनाव की मशीनों में टेम्परिंग हुई थी। 

राजनीतिक दलों के नेताओ को बुलाकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जांच करवाना और विश्वभर के सॉफ्टवेर और हार्डवेयर के छेत्र के धुरंदारो के सामने ओपन Hackthon करवाना इन दो बातों में जमीन आसमान का फर्क है।

क्या होती है असली हैकथन?

विश्व की बड़ी बड़ी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर कंपनियां जब भी अपनी नई प्रोडक्ट लॉन्च करती है तो पूरे विश्व में से अपने क्षेत्र के चुनिंदा लोगों को बुलवा कर अपनी प्रोडक्ट उनके हाथ में दे देती है और जाँच करवाती है।
टेक्नोलॉजी सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के सर्वश्रेष्ठ लोग इकट्ठा होकर नई प्रोडक्ट को क्रैक करने की कोशिश करते हैं और इस तरह से प्रोडक्ट को ज्यादा सक्षम और सुरक्षित बनाने में मदद करते है।
चुनाव आयोग ने सिर्फ राजनीतिक दलों के पढ़ अनपढ़ और कूपढ़ लोगों को जांच के लिए आमंत्रित किया है। इसका मतलब साफ है कि चुनाव आयोग जानता है कि उसकी मशीनें सुरक्षित नहीं है और अगर वो Hackthon रखते है तो चुनाव आयोग की पोल सबके सामने खुल जाएगी।
बड़ा सवाल यह उठता है कि भारतीय चुनाव आयोग, जो कि एक संवैधानिक संस्था है, वह क्यों ऐसे राजनीतिक पैतरे खेलने के लिए मजबूर हो गई है?




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