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लापता नजीब मामला : अदालत ने छात्रों की पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं कराने संबंधी याचिका फिर खारिज की

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले में नौ जेएनयू छात्रों की याचिका खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्हें लापता छात्र नजीब अहमद के विद्यालयों के मामले में लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए अपनी सहमति देने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा नहीं पूछा जा सकता है।

 मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास ने इन छात्रों को लाई डिटेक्टर टेस्ट की सहमति देने या न देने के लिए अदालत के समक्ष हाजिर होने के निर्देश दिये। अदालत ने मामले की सुनवाई छह अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी। इस मामले में संदिग्ध 9 विद्यार्थियों ने अदालत से दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा भेजे गए नोटिस को चुनौती देने के लिए कहा था ताकि मजिस्ट्रेट के सामने उनके बयान दर्ज करने के लिए उपस्थित होने की मांग की जा सके कि क्या वे लाई डिटेक्टर जांच से गुजरना चाहते हैं या नहीं। 

23 जनवरी को जारी नोटिस में जांच एजेंसी ने दावा किया था कि उनके लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए आवश्यक है कि वे नजीब के बारे में जानकारी प्राप्त करें। दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को जांच के अन्य रास्ते तलाशने के लिए नोटिस भेजा था क्योंकि अन्य सभी प्रयासों में कोई परिणाम नहीं निकल पाया। 

गौरतलब है कि 27 वर्षीय नजीब पिछले साल 14-15 अक्टूबर के बाद अपने जेएनयू छात्रावास में कथित तौर पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प के बाद गायब हो गए था। आरएसएस के छात्र विंग ने उसके गायब होने में किसी भी तरह की भागीदारी से इंकार किया है।




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