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PM मोदी के बाद भारत में इस्लामोफोबिया को हवा देने वाले दूसरे शख्स हैं यूपी के सन्यासी CM आदित्यनाथ

एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने यूपी के नए सीएम आदित्यनाथ को अपने मुस्लिम विरोधी बयानों को सार्वजनिक रूप से वापस लेने के लिए कहा गया है। एमनेस्टी का यह बयान हिंदू सन्यासी योगी के सीएम बनने के बाद आया है। बता दें कि इससे पहले मानवाधिकार के लिए काम करने वाले इस संगठन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बांटने वाला बताते कहा था कि वे एक ख़तरनाक़ दुनिया बना रहे हैं।

इसके अलावा अप्रवासियों को निकालने के ट्रंप के फैसले के बाद एमनेस्टी की सालाना रिपोर्ट में उन्हें खीजा हुआ और भेदभाव वाली राजनीति करने वाला बताया गया है।

बहरहाल, भारत में आबादी के लिहाज़ से सबसे बड़ा राज्य होने के नाते उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय राजनीति पर खासा असर रहा है हमेशा से, हालाँकि एक संवेदनशील वाला राज्य भी है, जहां साल 1988 में अयोध्या के मन्दिर विवाद को लेकर हुए दंगों में 2000 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

आदित्यनाथ अपने मुस्लिम विरोधी, भड़काऊ और विवादित बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं। लव जिहाद का मुद्दा जोर-शोर से उठा चुके हैं। मुस्लिम महिलाओं को कब्र से निकाल कर उनके साथ बलात्कार करने जैसे शर्मनाक भाषण भी दे चुके हैं।

साल 2015 में उन्होंने कहा कि यदि उन्हें मौका दिया गया था तो वह हर मस्जिद में हिंदू देवताओं की मूर्तियों को स्थापित करेंगे। वहीँ 2014 में आए एक एक वीडियो में उन्होंने कहा कि यदि मुसलमान एक हिंदू लड़की लेते हैं, तो हम 100 मुस्लिम लड़कियां ले लेंगे। यदि वे एक हिंदू को मारते हैं, तो हम 100 मुसलमानों को मार देंगे।

अब नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के बाद सूबे के सीएम के तौर पर आदित्यनाथ को चुनना दरअसल भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया की ओर ईशारा कर रहा है। यूँ तो यूपी में सांप्रदायिक तनाव के मामले लगातार होते रहे हैं लेकिन अब यह बात सामने आई है कि बीते दो दशकों से यहाँ इस्लामोफोबिया गहरी जड़ें पनप रही हैं। पिछले साल भीड़ ने एक मुस्लिम अधेड़ अख़लाक़ को भीफ की अफवाह के बाद पीट-पीट कर मार डाला था।

वहीँ गाय को माता मानने वाले आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को आपराधिक आरोपों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए जो गाय के खिलाफ हो। उत्तर प्रदेश के चुनाव में आदित्यनाथ ने कथित तौर पर लोगों से मुस्लिम मुक्त भारत से वादा किया था इसलिए हिंदू अपनी जाति और वर्ग के पूर्वाग्रह को भूल गए और भाजपा के लिए धर्म के आधार पर मतदान किया।

देखा जाए तो मोदी और आदित्यनाथ के बीच कई समानताएं भी हैं। दोनों ही के भारतीय राजनीति में वोटों का ध्रुवीकरण करते रहे हैं। 2002 में गुजरात में दंगों में मोदी की कथित भागीदारी, हालांकि किसी भी अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है, ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भेज दिया।

इसी तरह आदित्यनाथ को भी जनता प्यार करती है क्योंकि दोनों ही गाय और अयोध्या में मंदिर के संरक्षक के तौर पर खुद को क्लेम करते हैं।

अयोध्या मंदिर का मुद्दा कोयले की खानों की तरह है जो दिखाई नहीं दे रहा है, लेकिन सतह के नीचे सुलग रहा है। गाय का मुद्दा तेजी से राष्ट्रीय जुनून के तौर पर पनपता जा रहा है।

आदित्यनाथ की नई वेबसाइट पर तो मतदान चल रहा है कि क्या गौवध करने वाले को गंभीर रूप से दंडित किया जाना चाहिए। इस पर 98 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यह होना चाहिए। मोदी का विकास का वादा पिछड़ रहा है, नोटबंदी की आलोचना भी ख़त्म हो गई है। अब योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व का एक कार्ड बनकर उभरे हैं।




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