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मोदी सरकार की बदौलत राजनीतिक दल अब नहीं देंगे चुनावी फंड का ब्यौरा!

नई दिल्ली: अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चुनावी फंडिंग में ट्रांसपेरेंसी लाने की बात कही थी लेकिन ऐसा होने के आसार बिल्कुल नहीं लग रहे हैं। केंद्र सरकार ने फाइनेंस बिल (2017) में राजनीतिक फंडिंग से जुड़े कुछ नए प्रावधान शामिल किए हैं। जिससे साबित होता है कि केंद्र सरकार चुनावी फंडिंग पर कोई जानकारी नहीं देना चाहती। फाइनेंस बिल में सरकार द्वारा किए गए संशोधन के तहत कंपनियों द्वारा पार्टी को चंदा देने में अधिक छूट देने जैसे कई प्रावधान बनाये गए है। जिसपर विपक्ष द्वारा सवाल उठाये जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है इस बिल में किए जाने वाले बदलावों पर संसद में लाकर चर्चा करनी चाहिए।
आपको बता दें की यहाँ राजनीतिक पार्टियों को पहले 20000 रूपये तक के चंदे का ब्यौरा देना पड़ता था अब जनप्रतिनिधित्व कानून (1951) में प्रस्तावित संशोधनों के तहत अब राजनीतिक पार्टियों को 2,000 रुपये से अधिक के चंदे का ब्यौरा चुनाव आयोग को देना पड़ेगा।
लेकिन कई जानकारों का मानना है कि इससे स्थिति में कुछ खास असर नहीं पड़ेगा।

नए प्रावधान के तहत चुनावी फंडिंग में ट्रांसपेरेंसी आने की बजाये भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। क्योंकि अब सरकार ने कंपनियों द्वारा राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने की सीमा खत्म कर दी गई है। जिसके चलते अब कोई कंपनी जितना चाहे फंड पार्टियों को दे सकती हैं। कंपनी का नाम और उसने कितना चंदा दिया है ये सब गोपनीय रखा जाएगा। इससे पहले पिछले साल सरकार ने विदेशों से चंदा लेने वाली रोक को भी हटा दिया था।




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