All Categories


Pages


विश्वविद्यालयों में चल रहे दलित और अल्पसंख्यक विभागों को बंद करने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली: भारत सरकार की संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों में चलने वाले सोशल डिस्क्रिमिनेशन रिसर्च सेंटर्स को मिलने वाले फंड में कटौती करने का फैसला किया है। टेलीग्राफ अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूजीसी 31 मार्च के बाद उन सभी विश्वविद्यालयों के फंड में कटौती करेगी जिनकी स्थापना 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत हुई थी। 

वहीं दूसरी तरफ यूजीसी ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत खोले गए केंद्रो के फंड को फिर से रिन्यू कर दिया है। उम्मीद की जा रही थी कि 13वीं पंचवर्षीय योजना में इन केंद्रों को दोबारा रिन्यू कर दिया जाएगा। लेकिन यूजीसी ने इस तरह के सभी विश्वविद्यालयों को सर्कुलर जारी कर कहा है कि इन केंद्रों को मिलने वाला सरकारी फंड 31 मार्च के बाद नहीं दिया जाएगा।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यूजीसी की अवर सचिव सुषमा राठौर को एक संदेश भेजकर इसकी जानकारी दी है। उसमें कहा गया है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंत में इन विश्वविद्यालयों को यूजीसी की तरफ से कोई सहायता राशि नहीं दी जाएगी। इसमें यह भी कहा गया है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के बाद यूजीसी इस समावेशी नीति के लिए जिम्मेदार नहीं होगा और न ही संस्था ऐसे किसी मुद्दे पर विचार करेगा।

सूत्रों के मुताबिक, ये सभी आदेश उन सभी केंद्रों को भेज दिया गया है जिन्हें विश्वविद्यालय के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है। दिल्ली विश्वविद्यालय के अंबेडकरवादी और राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एन. सुकुमार ने बताया है कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की विचारधारा मानने वाले दलित रिसर्चर्स की विडंबना है कि इन केंद्रों को बंद किया जा रहा है।

 उन्होंने कहा कि सरकार अब इसके जगह पर वैदिक शिक्षा पर फंड खर्च करेगी। बता दें कि जेएनयू में भी इस तरह के एक केंद्र को बंद करने का आदेश दिया गया है। हालांकि सरकार का यह आदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वक्तव्यों के विरुध है जिसे उन्होंने साहेब भीमराव अंबेडकर की 125 जयंती पर कहा था। उन्होंने कहा था कि सरकार दलितों को आगे बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लागू करेगी।



About the Author

Administrator

Comments


No comments yet! Be the first:

Your Response



Most Viewed - All Categories


Daily Khabarnama Daily Khabarnama