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मेवात में सगाई की रस्म और दहेज लेन-देन पर पाबंदी, बारात में जाएंगे केवल 10 लोग

प्रतीकात्मक तस्वीर  

अगर आप शादियों में दहेज की मांग करते हैं या फिर अपने बच्चों की शादी धूमधाम से करने का मन बना रहे है तो जरा संभल जाएँ। क्योंकि अब ऐसी शादियों पर ग्राम स्तर पर बन रही ग्राम सुधार कमेटी की नजर रहेगी, जो शादी करने वाले परिवारों को पहले तो समझाएंगे और न मानने पर ऐसे परिवारों का न केवल हुक्का पानी बंद किया जाएगा बल्कि उनका बिरादरी में बहिष्कार किया जाएगा। यह फैसला रविवार को बीसरू रोड स्थित मरकज के सामने हुई महापंचायत में सुनाया गया।

महापंचायत में हरियाणा के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के मौजिज लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान समाजिक बुराईयों को खत्म करने के लिए दर्जनों फैसले लिए गए। महापंचायत की अध्यक्षता मौलाना रशीद मीलखेडा ने की, इसमें आम जनता के साथ-साथ स्थानीय धार्मिक उलेमा, नेतागण, समाजसेवी, बुद्धिजीवी, कर्मचारी, युवा, व्यापारी, जिला परिषद, ब्लॉक समिति और अलग-अलग पंचायतों के पदाधिकारी शामिल हुए।

इस दौरान पंचायत में दहेज को समाज की बड़ी बुराई मानते हुए इस पर प्रतिबंध के लिए चर्चा की गई। महापंचायत में आए सभी लोगों ने अपना समर्थन देते हुए शादियों में दहेज पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की।

महापंचायत मौजूद लोगों ने कहा कि दहेज के कारण न जाने कितने परिवार उजड़ गए। कर्ज लेकर अपनी लड़कियों की शादी करने वाले परिवार की पूरी जिंदगी कर्ज उतारने में लग जाती है। मौजिज लोगों ने कहा कि शादियों में अपनी हैसियत के ज्यादा खर्च करना, शादी से पहले सगाई की रस्म अदा करना इस्लाम के खिलाफ है और इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए।




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