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सक्षम होने के बावजूद हारीज़ को सेना प्रमुख नहीं बनाकर सरकार ने देश के मुसलमानों का मनोबल तोड़ा

नई दिल्ली। नये आर्मी प्रमुख के नियुक्ति को सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और लेफ्ट ने नियुक्ति पर कहा है कि दो सीनियर अधिकारीयों के रहते हुए सरकार का यह तरीका बिल्कुल सवाल खड़ा करने वाले हैं। इस बहस में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब शहज़ाद पूनावाला के ट्यूट कर एक नया बहस छेड़ दिया। शहजाद पुनावाला ने नियुक्ति पर आर्मी ट्रेडिशन को नजरअंदाज करने का इल्ज़ाम लगाया। शहजाद पुनावाला ने सरकार के इस फैसले पर कई ऐसे सवाल खड़े किए जिस पर बहस हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जर्नल रावत को आर्मी चीफ़ नियुक्त किया गया, इस नियुक्ति प्रक्रिया में काफी देर की गई है।



शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि दो सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल जो कि सक्षम है, मोदी सरकार ने उन्हें नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि प्रवीण बक्शी जो सबसे सीनियर हैं और काबिल भी उनको ओवर लुक किया गया है। दुसरे सीनियर पीएम हारीज के बारे में शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि उन्होंने देश को बहुत सेवाएं दी हैं, उनकी तारीफ होती है। उनको बहुत सारे मेडल मिले हैं उन्हें भी नज़र अंदाज कर दिया गया।


मालूम हो कि ले.ज. पीएम हारिज को अति विशिष्ट सेना मेडल, सेना मेडल, विशिष्ट सेवा पदक जैसे सम्मान मिल चुके हैं। ले.ज. हारिज ने मिलिटरी ऑबजरवर, चीफ पर्सन आफिसर, अंगोला में रिजनल कमांडर के अलावा बटालियन, ब्रिगेड और डिवजन का भी नेतृत्व कर चुके हैं। फिलहाल दक्षिणा कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ के पद पर हैं जो भारतीय सेना का विशालतम भौगोलिक फार्मेशन माना जाता है।

शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि नियुक्ति में देर करने की वजह गलत प्रकियाओ से दबाव लाने की कोशिश है। शहज़ाद पूनावाला ने 1983 का हवाला देते कहा कि मान लिजिए कि उस वक्त एक सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल को छोड़कर जूनियर लेफ्टिनेंट जनरल को बनाया गया था आर्मी चीफ़। उस वक्त सिर्फ़ एक सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल को ओवर लुक कर जूनियर को आर्मी चीफ़ बनाया गया था।

अगर 1983 का प्रोटोकॉल फॉलो किया जाता है तो हारीज साहब को इसलिए खारिज कर दिया गया है क्योंकि शायद मोदी सरकार की मानसिकता यह नहीं थी कि एक मुसलमान आर्मी चीफ़ बने। शहजाद पुनावाला ने इसे उत्तर प्रदेश के चुनाव से जोड़ा। शहजाद पुनावाला ने कहा कि यह बात सिर्फ मै ही नहीं एक सीनियर पत्रकार हरतोश सिंह बल ने भी कही है। शहज़ाद पूनावाला ने पीएम मोदी पर गंभीर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि मोदी जी जो रिश्ता रहा है देश के मुसलमानों से क्या संवैधानिक पदो पर नियुक्ति में भी रोल रहा है। उन्होंने ने कुछ लोगों को आड़े हाथ लिया जो यह कह रहे हैं कि यह सवाल सांप्रदायिकरण है।

शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि मैं खुद देश के मुसलमानों से कहते आया हूँ कि ज्यादा से ज्यादा नौजवान आप आर्मी में आओ, देश की सेना में अपनी सेवाएं दो, पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दो। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के मुसलमानों का मनोबल टूटने जैसा है। यह अच्छा मौका होता जब इस स्वतंत्र भारत को एक मुस्लिम आर्मी प्रमुख मिलता। शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि मेरा मोदी सरकार से सिर्फ़ इतना सवाल है कि लेफ्टिनेंट जनरल हारीज़ साहेब में क्या कमी थी? उनकी क्या गलती थी जो उन्हें खारिज कर दिया गया।




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