All Categories


Pages


क़रीम ख़ान और नवाब शमशुद्दीन ख़ान को दिल्ली गेट पर फाँसी पर लटकाया गया था...”मगर क्यूँ”’ जानिये

मेव क़ौम एक बहादुर क़ौम है, समझा जाता है कि मेवातियों की भय से दिल्ली के सभी दरवाज़े बंद कर दिए जाते थे। अंग्रेजों की हुकूमत में विलियम फ्रेज़र दिल्ली का रेजिडेंट हुआ करता था जो अपनी बर्बरता और अय्याशी के लिए मशहूर था । उसने अनगिनत महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाया था. मेवों और अंग्रेजों के बीच बहुत लंबा संघर्ष रहा है । विलियम फ्रेज़र फ़िरोज़पुर झिरका के नवाब शमसुद्दीन खां के यहाँ किसी काम से पहुँचा। उसी बीच उसने अपनी बुरी नज़र से एक महिला को देखकर भद्दी कमेंट किया और नवाब साहब ने सुन लिया । नवाब साहब ने इस बुराई को जड़ से ख़त्म करने का निश्चय किया।
नवाब साहब ने इस बुराई (विलियम फ्रेज़र) को खत्म करने के लिए अपने करीबी रंगाला गाँव के करीम खान को ज़िम्मेदारी सौंपी। करीम खान को भरमारू, गोली भरकर उड़ती हुई चिड़िया पर निशाना साधने वाला, बोला जाता था । विलियम फ्रेज़र हिंद राव में रहता था । नवाब साहब ने बन्दूक और काला घोड़ा करीम खान को सौंपकर दिल्ली रवाना किया । कुल छः महीने तक करीम खान दिल्ली में रहे मगर शिकार हाथ न लगा। राजा भरतपुर से विलियम फ्रेज़र की अच्छी दोस्ती थी । वह एक दिन राजा भरतपुर के यहाँ रात्रिभोज में शामिल होने के लिए निकल रहा था । काला घोड़ा पर काली वर्दी में करीम खान ने निशाना लगाया और विलियम फ्रेज़र को एक गोली में चित कर दिया और बन्दूक को कुंवा में फेंक कर फरार हो गये।
उस समय के पानीपत के रेज़िडेंट मेटकॉफ़ को14022140_1630885577202176_3266151416478646367_n दिल्ली भेजा गया । मेटकॉफ़ ने तहक़ीक़ात शुरू किया और बंदूक़ को कुंवा से निकलवाने में सफ़ल रहा । जब बंदूक़ की गुणवत्ता की जाँच हुई तब नवाब साहब के बंदूक़ पर शक़ बढ़ा । मेटकॉफ़ ने मेव में अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया और नवाब साहब के करीबी अनिया नाम के व्यक्ति को तोड़ने में सफ़ल रहा । इस पूरी भेद को अनिया ने खोल दिया । अँग्रेज़ों की पूरी फ़ौज नवाब साहब औ करीम खान को पकड़ने में सफ़ल रही. दोनों को दिल्ली लाया गया। 3 अक्टूबर 1835 में करीम खान और 7 अक्टूबर 1835 को नवाब शमशुद्दीन खान को दिल्ली गेट पर फाँसी पर लटकाया गया।
किसी सुनियोजित तऱीके से किसी अँगरेज़ अधिकारी की यह संभवतः पहली हत्या थी । मंगल पांडेय को फाँसी पर चढ़ाने से 22 वर्ष पूर्व ही नवाब शमसुद्दीन और करीम खान को फाँसी पर लटकाया जा चूका था । मगर ब्राह्मणवादी और वामपंथी इतिहासकारों ने इस घटना को इतिहास में कोई जग़ह नहीं दिया।
मेवात की इतिहास जानने के लिए शैल मायाराम और इंजीनियर सिद्दीक़ मेव को अवश्य पढ़िये ।
-Tarique Anwar Champarni



About the Author

Administrator

http://teesrijungnews.com/


Comments


No comments yet! Be the first:

Your Response



Most Viewed - All Categories


Daily Khabarnama Daily Khabarnama