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सेनापति हकीम खां सूर की मजार पर असामाजिक तत्वों ने की तोड़फोड़

मेवाड़की आन-बान शान के लिए हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर के खिलाफ तलवार खिंचने वाले प्रमुख अफगानी योद्धा हकीम खान सूर की मजार पर असामाजिक तत्वों ने बुधवार को तोड़फोड़ कर दी। मजार पर पेश की चादरें हटा दी। बुधवार सुबह 9 से 11 बजे के बीच हुई इस घटना से हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय में काफी रोष है। रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इधर, ग्रामीणों ने आरोपियों को गिरफ्तार करने की भी मांग की। जानकारी के अनुसार शाहीबाग इलाके के अंतिम छोर और हल्दीघाटी की मुख्य चढ़ाई की शुरुआत में सड़क की बांई ओर ठीक मुहाने पर स्थित हकीम खां सूर की मजार को असामाजिक तत्वों ने तोड़ दी। मजार में मार्बल जड़े पत्थरों पर पत्थर पटक-पटक कर तहस-नहस कर दिया। स्थानीय युवक याकूब खां ने उदयपुर जाते वक्त मजार का हाल देखकर ग्रामीणों को सूचना दी। 



हकीम खां सूर अफगानी मुस्लिम पठान थे। हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना के खिलाफ महाराणा प्रताप की सेना के सेनापति के रूप में रहे। दूसरी ओर अकबर की तरफ से आमेर के राजा मान सिंह सेनापति रहे। साम्प्रदायिक सौहार्द आत्म स्वाभिमान के लिए महाराणा प्रताप की सेना में शामिल हुए। मजार के बारे में प्रचलित किवदंतियों है कि महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच युद्ध के दौरान मेवाड़ी सेना नायक हकीम खां सूर का रक्त तलाई में सिर धड़ से अलग हो गया। इसके बावजूद वे घोड़े पर बिना सिर शौर्य से लड़ते हुए दुश्मनों से लोहा लेते रहे। प्राणांत हो जाने पर घोड़े पर उनका धड़ हल्दीघाटी तक आकर यहां गिरा। जहां कुछ सदियों बाद उनकी समाधि बनाई गई। उन्हें पीर का दर्जा दिया गया। जहां मुस्लिम हिंदू समुदाय के लोग मन्नत पूरी होने के मथा टेकते हैं। सिर जहां गिरा वहां एक स्थान (मजार) रक्त तलाई में स्थित है। यहां हर वर्ष 18 जून को मुस्लिम समाज के लोग कौमी एकता कमेटी के माध्यम से धार्मिक कार्यक्रम होते है। 





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